आंतों की सूजन बन रही हड्डियों की कमजोरी का बड़ा कारण: एम्स के विशेषज्ञ की नई खोज

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एम्स के ट्रांसलेशनल इम्यूनोलॉजी, ऑस्टियोइम्यूनोलॉजी एंड इम्यूनोपोरोसिस लैब के प्रमुख एडिशनल प्रोफेसर डॉ. रूपेश कुमार श्रीवास्तव के अनुसार, ऑस्टियोपोरोसिस (हड्डियों की कमजोरी) का कारण सिर्फ कैल्शियम की कमी या एस्ट्रोजन हार्मोन का घटना नहीं है। बल्कि आंतों में होने वाली सूजन (गट इन्फ्लेमेशन) इसमें अहम भूमिका निभाती है। मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन की कमी से आंतों की इम्यून सिस्टम प्रभावित होती है, जिससे सूजन बढ़ती है और यह सूजन धीरे-धीरे हड्डियों को खोखला व कमजोर बनाती है।

नई दिल्ली: कई महिलाओं को मेनोपॉज के बाद घुटनों में दर्द, कमर में अकड़न या छोटी-मोटी ठोकर से हड्डी टूटने की शिकायत होती है। आमतौर पर इसे उम्र और हार्मोन की कमी का नतीजा माना जाता है। लेकिन अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के शोधकर्ताओं ने इस समस्या का एक नया और महत्वपूर्ण पहलू सामने लाया है।

एम्स के ट्रांसलेशनल इम्यूनोलॉजी, ऑस्टियोइम्यूनोलॉजी एंड इम्यूनोपोरोसिस लैब के प्रमुख एडिशनल प्रोफेसर डॉ. रूपेश कुमार श्रीवास्तव के अनुसार, ऑस्टियोपोरोसिस (हड्डियों की कमजोरी) का कारण सिर्फ कैल्शियम की कमी या एस्ट्रोजन हार्मोन का घटना नहीं है। बल्कि आंतों में होने वाली सूजन (गट इन्फ्लेमेशन) इसमें अहम भूमिका निभाती है। मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन की कमी से आंतों की इम्यून सिस्टम प्रभावित होती है, जिससे सूजन बढ़ती है और यह सूजन धीरे-धीरे हड्डियों को खोखला व कमजोर बनाती है।

डॉ. श्रीवास्तव ने इस पूरी प्रक्रिया को "इम्यूनोपोरोसिस" (Immunoporosis) नाम दिया है, जो ऑस्टियोपोरोसिस की इम्यूनोलॉजी से जुड़ी नई अवधारणा है। उन्होंने इसे एक नया क्षेत्र स्थापित किया है, जिसमें इम्यून सिस्टम और हड्डियों के बीच संबंधों पर गहन शोध हो रहा है।

आंतों के स्वास्थ्य का हड्डियों से गहरा नाता

शोध में यह बात सामने आई है कि आंतों में मौजूद लाभकारी बैक्टीरिया (गट माइक्रोबायोम) हड्डियों की मजबूती बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। खासकर लैक्टोबैसिलस एसिडोफिलस जैसे प्रोबायोटिक बैक्टीरिया आंतों की सूजन को कम करते हैं और पाचन को बेहतर बनाते हैं, जिससे हड्डियों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

डॉ. श्रीवास्तव बताते हैं, "जब आंतों में सूजन बढ़ती है, तो हड्डियों का क्षरण तेज हो जाता है और फ्रैक्चर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। लेकिन अगर हम आंतों की सूजन को नियंत्रित कर सकें, तो हड्डियों की कमजोरी और टूटने के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।"

उनका मानना है कि आने वाले समय में ऑस्टियोपोरोसिस का इलाज सिर्फ कैल्शियम, विटामिन-डी या हार्मोन थेरेपी तक सीमित नहीं रहेगा। बल्कि आंतों के बैक्टीरिया (गट माइक्रोबायोम) और इम्यून सिस्टम को संतुलित करने वाली थेरेपी इसमें मुख्य भूमिका निभाएंगी।

हड्डियों को मजबूत रखने के आसान उपाय

हड्डियों की सेहत बनाए रखने के लिए डॉक्टरों की सलाह:

  • धूप का लाभ लें — रोज सुबह 15-20 मिनट धूप में बैठें, ताकि शरीर में विटामिन-डी बने।
  • प्रोबायोटिक्स बढ़ाएं — दही, छाछ, इडली-डोसा जैसे फर्मेंटेड फूड्स और ताजे फल-सब्जियां खाएं।
  • कैल्शियम युक्त आहार — दूध, पनीर, छाछ, तिल, रागी, सोयाबीन और मूंगफली को डाइट में शामिल करें।
  • व्यायाम न भूलें — वॉकिंग, योग या हल्का वेट ट्रेनिंग रोज करें।
  • हल्दी वाला दूध — सूजन कम करने के लिए रात को हल्दी वाला दूध पी सकते हैं।
  • नुकसानदायक चीजों से बचें — ज्यादा नमक, चीनी, धूम्रपान और शराब से दूर रहें।
  • पानी भरपूर पिएं — दिनभर पर्याप्त पानी पीना हड्डियों और आंतों दोनों के लिए फायदेमंद है।

सावधानियां और सलाह

  • 50 साल की उम्र के बाद नियमित बोन डेंसिटी टेस्ट (DEXA स्कैन) करवाएं।
  • दर्द या कमजोरी को सिर्फ उम्र का असर समझकर नजरअंदाज न करें।
  • घर में फिसलन-रहित फर्श और अच्छी रोशनी का इंतजाम करें ताकि गिरने का खतरा कम हो।

यह नई खोज बताती है कि हड्डियों की सेहत सिर्फ कैल्शियम या दवाओं से नहीं, बल्कि आंतों की अच्छी सेहत और मजबूत इम्यून सिस्टम से भी जुड़ी है। स्वस्थ आहार, सक्रिय जीवनशैली और समय पर जांच से आप ऑस्टियोपोरोसिस से आसानी से बच सकते हैं।

(स्रोत: एम्स के डॉ. रूपेश कुमार श्रीवास्तव के शोध और ऑस्टियोइम्यूनोलॉजी अध्ययनों पर आधारित)

 

 

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