मन के हारे हार है, मन के जीते जीत- आत्मविश्वास से गढ़ें नये कीर्तिमान

अनुवन्दना माहेश्वरी @BareillyLive. कहावत है कि मन के हारे हार है, मन के जीते जीत। अर्थात हमारी सफलता और असफलता हमारी मनोस्थिति ही निर्भर करती है। मनोस्थिति की मजबूती यानि दृढ़ आत्मविश्वास। जैसे जीवन जीने के लिए हवा और पानी की आवश्यकता है वैसे ही सफलता के लिए आत्मविश्वास आवश्यक है। महाभारत के युद्ध में अर्जुन को जब श्रीकृष्ण ने गीता का उपदेश देकर उनका आत्मविश्वास बढ़ाया, फिर परिणाम क्या रहा, सभी जानते हैं। हमारा आत्मविश्वास वह ऊर्जा है, जो जीवन में आने वाली बाधाओं एवं परेशानियों से लड़कर जीतने का साहस प्रदान करती है।
महात्मा गांधी ने आत्मविश्वास की ताकत पर सत्य और अहिंसा के अस्त्र को लेकर भारत की स्वतंत्रता में अहम भूमिका निभायी। अब्राहम लिंकन ने दासों को मालिकों के शिकंजे से मुक्त कराया। कोलंबस ने अमेरिका की खोज कर डाली तो नेपोलियन ने आत्मविश्वास से ओतप्रोत होकर अपने सेनापति से कहा था कि यदि आल्पस पर्वत हमारा मार्ग रोकता है तो वह नहीं रहेगा। वास्तव में उस विशाल पर्वत को काटकर रास्ता बना लिया गया।
यदि आपको लगता है कि आपका आत्मविश्वास डोल रहा है तो आपके लिए यहां कुछ टिप्स दे रहे हैं। इन्हें अपनाकर अपना आत्मविश्वास जगाइये और दृढ़ संकल्पित होकर नये कीर्तिमान स्थापित कीजिए।
छोटे-छोटे लक्ष्य बनायें
शुरूआत में कुछ छोटे-छोटे लक्ष्य निर्धारित करें और उन्हें पूरी शक्ति के साथ पूर्ण करें। इससे आपके आत्मविश्वास में वृद्धि होगी और आपमें कुछ बड़ा करने की इच्छा जागृत हो जाएगी।
एक समय में एक ही कार्य
वैसे तो नारी को अष्टभुजा कहते हैं लेकिन किसी भी कार्य को शत प्रतिशत सही ढंग से करने लिए एक समय में एक ही कार्य करें। कार्य की आवश्यकता और प्रकृति के अनुसार कार्ययोजना बनायें, फिर उसे सम्पादित करें। इससे कार्य की उच्च गुणवत्ता की संभावना बढ़ जाएगी। आपका आत्मविश्वास भी और बढ़ेगा।
कपड़े पहनने का तरीका बदलें
कपड़े तो हम सभी पहनते हैं लेकिन यदि ये आप पर अच्छे लगेंगे तो क्या कहने? इसके लिए अवसर और आवश्यकता के अनुसार सुन्दर लेकिन सौम्य वस्त्रों का चयन आपके व्यक्तित्व में चार चांद लगा देगा। लोग आपके ड्रेस सेन्स की तारीफ करेंग।े इससे भी आापका आत्मविश्वास बढ़ेगा।
आंख मिलाकर बात करें
आमतौर पर आत्मविश्वास की कमी के कारण किसी से आंख मिलाकर बात नहीं कर पाते। जब हम बात करते वक्त इधर-उधर देखते हैं तो सामने वाले व्यक्ति को प्रतीत होता है कि आप उसमें रुचि नहीं ले रहीं। आंख मिलाकर बात करने का अभ्यास कीजिए। इससे आपके व्यक्तित्व में स्वतः ही निखार आएगा और लोगों से आपके सम्बंध भी प्रगाढ़ होने लगेंगे।
अतीत की उपलब्धियों को याद करें
जब आपका आत्मविश्वास डिगने लगे तो अपने अतीत की उपलब्धियों को याद करें। लेकिन उसकी तुलना वर्तमान से न करें और स्वयं को नयी उपलब्धियां प्राप्त करने के लिए तैयार करें। बीते दिनों में मिली सफलता की यादें आपको पुनः सफल होने के लिए प्रेरित करेंगी।
डर के आगे जीत है
किसी भी कार्य को करते समय विफल होने के विचार से डरें नहीं। गिरता वही है जो चलने और चढ़ने की कोशिश करता है। याद रखें शिखर पर भी वही पहुंचता है जो चढ़ने का प्रयास करता है। गलतियों से डरें नहीं, गलती होगी तो सुधार करने का रास्ता भी मिलेगा। साथ ही मिलेगा दोबारा गलती न करने का अनुभव। याद रखें डर के आगे जीत है।
सकारात्मक रहें, खुद से बात करें
विश्वास रखिए कि आप स्वयं में विशेष हैं। आप जैसा कोई दूसरा नहीं है, किसी से अपनी तुलना नहीं करें। किसी की समृद्धि, सम्पत्ति, रहन-सहन आदि से अपने जीवन की तुलना नहीं करें। क्या खोया? इसमें उलझे रहने की अपेक्षा आपके पास उपलब्ध संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग कैसे करें? इस पर फोकस करें। अपने लिए कुछ समय निकालें। कुछ मिनट नियमित रूप से मौन रहकर ध्यानमग्न होकर अपने अंदर झांकने का प्रयास करें। स्वयं से बात करें, स्वयं को खोजें। इससे आप जीवन को बेहतरीन बना सकेंगी।
क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. एस. धनन्जय कहते हैं कि जब मन विचलित होता है तो आत्मविश्वास में कमी आ जाती है। मन को शान्त करने के लिए नियमित रूप से योगाभ्यास, प्राणायाम और ध्यान करना चाहिए। शान्त मन से एकाग्रचित्त होकर पहले छोटे-छोटे संकल्प लें, उन्हें पूरा करें। इससे आत्मविश्वास मजबूत होता जाएगा। इसका नियमित अभ्यास आपको अधिक बेहतर और बड़ा करने के लिए प्रेरित करेगा।
डॉ. एस. धनन्जय
क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट


