मोबाइल है अचानक हृदयाघात व अनेक असाध्य रोगों का एक बड़ा कारण

Health@BareillyLive: आपने गौर किया होगा जहां भी छोटे बच्चे होते हैं उन्हें चुप कराने का सबसे अच्छा तरीका होता है तो वह स्मार्टफोन है। अगर बच्चा रो रहा है तो उसके हाथ में फोन थमा दीजिये चुप हो जाएगा। लेकिन यहां ध्यान रखने वाली बात है कि ज्यादा फोन पर वीडियो देखने के कारण बच्चे के मानसिक संतुलन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ते हैं।
बच्चे इसके प्रभाव में आकर ज्यादा से ज्यादा मोबाइल पर समय बिता रहे हैं। इसके चलते, 40 साल की उम्र के बाद होने वाली सर्वाइकल और डिप्रेशन , अनिद्रा जैसी बीमारियां कम उम्र में हो रही हैं । जिसके कारण शुगर हृदयरोगों और मोटापे का खतरा छह गुणा बढ़ रहा है।
अनिद्रा के कारण
कई बार सर्वाइकल के दर्द को लोग माइग्रेन समझ लेते हैं। लंबे समय तक इसी का इलाज चलता रहता है। दर्द निवारक दवाइयां लेते हैं।
पर्याप्त मात्रा में अच्छी नींद न लेने से अवसाद, वज़न बढ़ना और मोटापा, टाइप 2 मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग और याददाश्त और एकाग्रता संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ जाता है जिससे हृदय की गति धड़कनों और मांसपेशियों पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है
मोबाइल के अधिक प्रयोग के कारण मस्तिष्क और हार्मोन नियंत्रण पर भी गहरा असर पड़ रहा है
इसकी ब्लू लाइट से हार्मोनल असंतुलन हो सकता है. रात में फ़ोन इस्तेमाल करने से मेलाटोनिन हार्मोन कम बनता है, जिससे नींद न आने की समस्या हो सकती है. इससे हार्मोनल असंतुलन हो रहा है
जिससे हार्मोनल असंतुलन की वजह से मुंहासे, डायबिटीज़, थायरॉइड, बांझपन जैसी समस्याएं बढ़ रही है कम उम्र में पीरियड शुरू होना आदि समस्या तेजी से बढ़ रही है
8 से 15 साल तक के बच्चों में सर्वाइकल की समस्या सामने आई है। बच्चे सोफे, पलंग पर लेटे-लेटे या कुर्सी पर बैठकर एक तरफ गर्दन कर मोबाइल चलाते हैं। इससे कम उम्र में ही सर्वाइकल की समस्या बढ़ रही है।
मोबाइल का अंधाधुंध प्रयोग से C1 C2 C7 था D1 रीढ़ की हड्डियों तथा डिस्क पर बेहद घातक असर पड़ता है जिससे डिस्क बल्ज़ और हर्निएशन पैदा होता है और दिमाग से दिल की तरफ जा रही तंत्रिकाओं में बाधा आती है
सरवाइकल अस्थिरता स्वायत्त मायोपैथी या स्वायत्त न्यूरोपैथी पैदा करती है, जो तंत्रिका तंत्र की क्षति है जो मस्तिष्क और हृदय और रक्त वाहिकाओं के बीच भेजे जाने वाले संदेशों को अवरुद्ध या बाधित करती है,
इससे कई गंभीर लक्षण हो सकते हैं जिनमें धड़कन, धड़कनों का तेज़ होना या धड़कनों का रुक जाना, कंपन, दृष्टि का धुंधला होना, चक्कर आना, प्रीसिंकोप (बेहोश होने का एहसास) आता है , इससे वास्तव में बेहोश होना, सांस फूलना, सीने में दर्द, कंजेस्टिव हार्ट फेलियर और विभिन्न हृदय अतालता शामिल हैं। मायोकार्डियल इस्क्मिया, एनजाइना, एट्रियल फ़िब्रिलेशन, वेंट्रिकुलर टैचीकार्डिया, मिट्रल वाल्व प्रोलैप्स, पोस्टुरल ऑर्थोस्टेटिक टैचीकार्डिया सिंड्रोम (POTS), ड्रॉप अटैक और प्राण घातक लक्षण हाइपोटेंसिव एपिसोड जैसे निदान स्वायत्त विफलता से हो सकते हैं जिसका सर्वाइकल स्ट्रक्चरल एटियलजि हो सकता है
अतः अपने मोबाइल फोन का जितना हो सके कम प्रयोग करें और बच्चों को इस भयंकर उपकरण से जितना हो सके दूर रखिए !


